Hindi Poems

ऐ मेघा तुम बरसो  

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ऐ मेघा तुम बरसो
भर दे अपने बूँद-बूँद से
मेरा जिया हे जो तरसे
चूम मेरे नग्न बदन को
हर हिस्सा मेरे जिस्म को
मूँद लूँ मैं अपनी आँखें
ऐसे छू मेरे मन को
ऐ मेघा तुम बरसो।

मेरे बहने की धार..

वो कौन है जो मेरी अन्गारायियां और मेरी तनहाईयाँ को बढा रहा है
कहीं ऐसा कर के हमें कमजोर तो नहीं कर रहे हैं ?

बढा दो मेरी अन्गारायियां बढा दो मेरी तनहाईयाँ
पर हमें मजबूर न कर पाओगे
समंदर की तूफ़ान से हमने कस्ती निकलना सिखा है

बंद कर दो चाहे तुम कितने भी दरवाजे
नया दरबाजा बनाना हमने सिखा है

तप गया हूँ मैं इस दुनिया दारी के इस जंजाल में
पक गया हूँ मैं ज़िन्दगी के उस भठ्ठी की आड़ में
तुम तोड़कर भी मेरी अस्तित्व को न मिटा पाओगे !

मैं  किसी नदी की धार नहीं न ही किसी घोड़े की चाल
तुम चाह के भी न रोक पाओगे कभी मेरे बहने की धार !!

Shiv

काश मैं शिव होता तो मैं तांडव करता

धरती काँप उठती और उथल पुथल मच जाता

हर तरफ लोगों को भय का चेहरा दीखता

त्राहिमाम त्राहिमाम से जग गूँज उठता

आधे से जयदे तो डर के मर जाता

और बांकी को मैं जला देता

फिर अंत में जलाता खुदको,

क्योंकि न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।

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